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RBI On Plastic Currency: RBI ने बता दिया... कब लॉन्च होंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट

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Admin·May 6, 2026
RBI On Plastic Currency: RBI ने बता दिया... कब लॉन्च होंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट
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*कब लॉन्च होंगे

अभी तक कोई आधिकारिक लॉन्च डेट नहीं बताई गई है — केवल फील्ड ट्रायल को मंजूरी मिली है। रेगुलर सर्कुलेशन शुरू होगा या नहीं, ये पायलट प्रोजेक्ट के सफल मूल्यांकन के बाद ही तय होगा।

ट्रायल कैसे होगा

हर डिनॉमिनेशन (₹10 और ₹20) के 1 अरब (1 बिलियन) नोट पायलट के तहत जारी किए जाएंगे, जिसके बाद RBI तय करेगा कि इन्हें रेगुलर सर्कुलेशन में लाना है या नहीं।

कागज़ी नोट बंद नहीं होंगे

वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि पेपर करेंसी जारी रहेगी — पॉलिमर नोट इसकी जगह नहीं लेंगे, दोनों साथ-साथ चलेंगे। पूरी तरह से रिप्लेस करने का कोई प्लान नहीं है।

ये पहली बार नहीं है

ये भारत की दूसरी कोशिश है। 2012 में भी पहली बार ₹10 के पॉलिमर नोट 5 शहरों (जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर, कोच्चि) में ट्रायल के लिए प्रस्तावित हुए थे, लेकिन 2017 तक tendering stage तक पहुंचने के बाद ये प्लान तकनीकी और खरीद संबंधी दिक्कतों की वजह से रुक गया था। अब 2026 में ये आइडिया फिर से जिंदा हुआ है, इस बार दो डिनॉमिनेशन (₹10 और ₹20) के साथ।

पॉलिमर नोट लाने की वजह

RBI पॉलिमर नोट इसलिए ला रहा है क्योंकि ये पेपर नोट से 2.5 से 4 गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं, replacement cost कम करते हैं, नकली नोट (counterfeiting) के खिलाफ बेहतर सुरक्षा देते हैं, और currency management बेहतर बनाते हैं

पॉलिमर करेंसी नोट — गहराई से समझें
पॉलिमर नोट होते क्या हैं (Technical Detail)

पॉलिमर नोट पारंपरिक कॉटन-पेपर की जगह BOPP (Biaxially Oriented Polypropylene) नाम के खास प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनते हैं। भारत में RBI की सहायक कंपनी Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Private Limited (BRBNMPL) ने सुरक्षा फीचर्स वाली पॉलिमर शीट्स की सप्लाई के लिए ग्लोबल Expression of Interest (EoI) मंगाई है।

कानूनी आधार: RBI Act, 1934 की धारा 22 के तहत RBI के पास भारत में नोट जारी करने का विशेष अधिकार है।

दुनिया में स्थिति — भारत अकेला नहीं
60+ देश पहले से पॉलिमर करेंसी इस्तेमाल कर रहे हैं
ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले पॉलिमर नोट शुरू किए — आज भी सबसे सफल उदाहरण माना जाता है
रोमानिया (1998, यूरोप में पहला), कनाडा (2011), साथ ही UK, न्यूज़ीलैंड, सिंगापुर, मेक्सिको, ब्राज़ील, सऊदी अरब जैसे देश भी अपना चुके हैं
अमेरिका अपवाद है — डॉलर आज भी कॉटन-लिनन ब्लेंड पेपर पर छपता है, पॉलिमर पर नहीं
फायदे (Advantages)
फायदा डिटेल
टिकाऊपन पेपर नोट से 2.5 से 4 गुना ज़्यादा समय तक चलते हैं
नमी/पसीना प्रतिरोधी गंदगी, नमी, तेल सोखते नहीं — भारत जैसे विविध जलवायु वाले देश के लिए खास फायदेमंद
बेहतर सुरक्षा ट्रांसपेरेंट विंडो, कलर-शिफ्टिंग एलिमेंट्स, माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम — नकली नोट बनाना कठिन
कम रिप्लेसमेंट लागत (लॉन्ग-टर्म) बार-बार छपाई की ज़रूरत कम होती है
पर्यावरण के लिए बेहतर (लॉन्ग-टर्म) पूरे lifecycle में कार्बन फुटप्रिंट पेपर से कम हो सकता है, recycle भी हो सकते हैं
नुकसान/चुनौतियां (Disadvantages)
चुनौती डिटेल
शुरुआती लागत ज़्यादा पेपर नोट से 30-60% महंगे बनते हैं शुरुआत में
छोटे नोट पर असर ज़्यादा कम मूल्य के नोट (₹10, ₹20) के लिए उत्पादन लागत face value के 20-24% तक पहुंच सकती है
आयात पर निर्भरता भारत अपनी 20% पॉलीप्रोपाइलीन ज़रूरत विदेशों से आयात करता है — सप्लाई चेन रिस्क
इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड ज़रूरी ATM, नोट सॉर्टिंग मशीन, वेंडिंग मशीन — सबको नए नोट के हिसाब से recalibrate करना पड़ेगा
भारत का मौजूदा करेंसी खर्च (क्यों ज़रूरी है ये कदम)
RBI हर साल करेंसी छपाई और मेंटेनेंस पर लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च करता है
Security printing खर्च: FY24 में ₹5,101 करोड़, FY25 में ₹6,373 करोड़
भारत हर साल 20-24 अरब खराब/गंदे नोट नष्ट करता है — ज़्यादातर छोटे मूल्य वाले
डिजिटल पेमेंट vs कैश — दिलचस्प तथ्य

भले ही UPI हर साल 24,000 करोड़+ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करता है (85% रिटेल डिजिटल पेमेंट का हिस्सा), फिर भी भारत का Currency-to-GDP ratio 11% से ऊपर बना हुआ है — यानी कैश अभी भी बहुत ज़रूरी बना हुआ है, इसीलिए इसे modernize करना मायने रखता है।

भविष्य की दिशा — क्या सुझाव दिए गए हैं

  • छोटे डिनॉमिनेशन से शुरुआत करें (₹10, ₹20) — ये सबसे ज़्यादा घिसते हैं, cost-effective टेस्ट केस हैं

  • घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दें ताकि आयात निर्भरता कम हो
    पूरा cost-benefit और environmental impact assessment हो
    ATM/कैश-हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करें
    पेपर और पॉलिमर नोट साथ-साथ चलें, कोई demonetisation जैसी अचानक तब्दीली नहीं
    Digital India, UPI, और Digital Rupee के साथ तालमेल बिठाया जाए

    Bahut ache — ye latest updates hain (5 अगस्त 2026 की press conference से), जो पहली बार टाइमलाइन साफ करते हैं। पूरी गहराई से details:

    🔴 बड़ा अपडेट — अब टाइमलाइन क्लियर है!

    RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त 2026 को MPC मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर सब कुछ योजना अनुसार चला, तो अगले वित्त वर्ष (FY28, यानी अप्रैल 2027) की शुरुआत में पॉलिमर नोट सर्कुलेशन में आ जाएंगे।

    गवर्नर ने कहा — "हम अभी भी पायलट स्टेज पर हैं। हम भारतीय परिस्थितियों (जलवायु और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर) में इनके प्रदर्शन का परीक्षण और मूल्यांकन करेंगे। उसके बाद तय करेंगे कि इन्हें उसी रूप में स्केल करना है या बदलाव के साथ।"

    RBI गवर्नर ने बताईं 2 मुख्य वजहें

    गवर्नर मल्होत्रा ने पॉलिमर नोट लाने के पीछे दो मुख्य फायदे बताए — पहला, ये छोटे मूल्य के नोटों का टिकाऊपन और उम्र बढ़ाते हैं। दूसरा, जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, पॉलिमर नोट RBI की करेंसी प्रिंटिंग क्षमता को भी बढ़ाएंगे।

    टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

    RBI ने पॉलिमर सब्सट्रेट खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोट कई चरणों की टेस्टिंग से गुज़रेंगे, जिसमें सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी शामिल है, इससे पहले कि इन्हें जारी किया जाए।

    सुरक्षा फीचर्स — अभी गुप्त रखे गए हैं

    पॉलिमर नोट में ट्रांसपेरेंट विंडो और बेहतर एंटी-काउंटरफीटिंग एलिमेंट्स जैसे उन्नत सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन इन सुरक्षा फीचर्स की डिटेल्स सही समय पर ही सार्वजनिक की जाएंगी, ऐसा गवर्नर मल्होत्रा ने कहा — जाहिर तौर पर नकल रोकने के लिए ये जानकारी अभी गुप्त रखी गई है।

    🌍 पर्यावरण एंगल — TERI स्टडी की खास बात

    RBI द्वारा कमीशन की गई TERI (The Energy and Resources Institute) की स्टडी में एक दिलचस्प बात सामने आई: पॉलिमर नोट के कम manufacturing cycles और कम transport trips की वजह से, शुरुआती उत्पादन में ज़्यादा प्रभाव होने के बावजूद, इनका पूरे जीवनकाल में कार्बन फुटप्रिंट पेपर नोट से कम होता है।

    ⚠️ नई चुनौती जो पहले नहीं बताई — क्रूड ऑयल कनेक्शन

    चूंकि पॉलिमर पॉलीप्रोपाइलीन (petrochemical product) से बनता है, इसलिए पॉलिमर नोट के उत्पादन की लागत सीधे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में सप्लाई डिस्टर्बेंस से प्रभावित होती है — ये एक नया रिस्क फैक्टर है जो पेपर नोट में नहीं था।

    तुलना — कहां खड़ा है भारत का करेंसी सिस्टम
    भारत में अभी ₹41 लाख करोड़ से ज़्यादा करेंसी सर्कुलेशन में है
    RBI का लक्ष्य है एक साफ, ज़्यादा टिकाऊ कैश इकोसिस्टम बनाना, digital rupee और UPI के साथ तालमेल बिठाते हुए
    पुराना इतिहास संदर्भ — क्यों 2012 का प्रयास फेल हुआ

    2012 का प्रस्ताव कभी implementation तक नहीं पहुंच पाया था — दशक भर पुराना ये आइडिया अब दोबारा जीवित हुआ है, इस बार बेहतर तैयारी और स्पष्ट टाइमलाइन के साथ।

    संक्षेप में — नया क्या पता चला
    पहले क्या पता था अब क्या नया पता चला
    सिर्फ फील्ड ट्रायल को मंज़ूरी मिली थी FY28 (अप्रैल 2027) से सर्कुलेशन का टारगेट तय हो गया
    लॉन्च डेट अनिश्चित थी गवर्नर ने खुद सार्वजनिक तौर पर टाइमलाइन बताई
    सुरक्षा फीचर्स अनजान थे अभी भी गुप्त, पर बताया गया इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो जैसे advanced features होंगे
    पर्यावरण असर अस्पष्ट था TERI स्टडी से कन्फर्म हुआ — लॉन्ग-टर्म में carbon footprint कम

    नोट करने वाली बात: ये अभी भी "targeting" है, confirmed launch date नहीं — गवर्नर ने खुद कहा "subject to successful completion of ongoing pilot trials" (अगर ट्रायल सफल रहे तभी)। तो फाइनल तस्वीर पायलट प्रोग्राम के नतीजों पर निर्भर करेगी।

    उम्मीद है ये गाइड आपके काम आई होगी। अगर कोई सवाल हो तो नीचे comment करें, हम जवाब देने की कोशिश करेंगे।