
NABARD क्या है?
NABARD (National Bank for Agriculture and Rural Development) भारत की शीर्ष विकास वित्तीय संस्था (Apex Development Financial Institution) है, जो कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के सतत, समावेशी और संतुलित विकास के लिए समर्पित है। यह भारत सरकार और RBI की संयुक्त पहल है, और इसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।
सरल शब्दों में कहें तो NABARD वह संस्था है जो किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, सहकारी समितियों और छोटे व्यवसायों तक पैसा पहुंचाने का काम करती है — लेकिन सीधे नहीं, बल्कि बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से। इसे अक्सर "बैंकों का बैंक" (Banker's Bank for Rural Sector) भी कहा जाता है।
NABARD का इतिहास और पृष्ठभूमि
आज़ादी के बाद के दशकों में भारत में कृषि ऋण व्यवस्था बिखरी हुई थी। कृषि ऋण की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं के बीच बंटी हुई थी — कभी RBI के Agricultural Credit Department (ACD) के पास, कभी Reserve Bank of India Rural Planning and Credit Cell (RPCC) के पास, तो कभी Agricultural Refinance and Development Corporation (ARDC) के पास। इससे नीति-निर्माण, कार्यान्वयन और निगरानी में तालमेल की भारी कमी थी।
शिवरामन समिति (B. Sivaraman Committee): 1979 में भारत सरकार ने एक समिति बनाई जिसकी अध्यक्षता श्री बी. शिवरामन ने की। इस समिति को कृषि और ग्रामीण विकास के लिए एक एकीकृत (unified) संस्थागत ढांचे की सिफारिश करने का काम सौंपा गया था।
समिति ने सुझाव दिया कि कृषि, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और ग्रामीण शिल्प से जुड़े सभी प्रकार के ऋण और विकास कार्यों को एक ही छत के नीचे लाया जाए। इसी सिफारिश के आधार पर संसद ने National Bank for Agriculture and Rural Development Act, 1981 पारित किया, और 12 जुलाई 1982 को NABARD औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया।
शुरुआत में NABARD ने RBI के Agricultural Credit Department, Rural Planning and Credit Cell, और Agricultural Refinance and Development Corporation — इन तीनों संस्थाओं के कार्यों और संसाधनों को अपने अंदर समाहित किया।
NABARD की स्थापना के उद्देश्य
● कृषि, लघु उद्योग, कुटीर व ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण गतिविधियों के लिए ऋण और अन्य सुविधाएं प्रदान करना
● ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत ऋण ढांचे (institutional credit structure) को मजबूत करना
● राज्य सहकारी बैंकों (State Cooperative Banks) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) की निगरानी और मार्गदर्शन करना
● ग्रामीण बुनियादी ढांचे (सड़क, सिंचाई, बिजली, भंडारण) के विकास के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता देना
● वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देना, खासकर वंचित और सीमांत वर्गों के लिए
● ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सतत और पर्यावरण-अनुकूल विकास को सुनिश्चित करना
संगठनात्मक ढांचा (Organisational Structure)
NABARD का प्रबंधन एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा किया जाता है, जिसमें भारत सरकार, RBI, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
● अध्यक्ष (Chairman): NABARD का नेतृत्व एक चेयरमैन करता है, जिसकी नियुक्ति भारत सरकार करती है। वर्तमान में श्री शाजी के. वी. (Shaji K. V.) NABARD के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने 2022 से यह पद संभाला है। इससे पहले वे केनरा बैंक और RBI में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं।
● मुख्यालय: मुंबई, महाराष्ट्र
● क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Offices): NABARD के लगभग हर राज्य में क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जो स्थानीय स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करते हैं
● पूंजी संरचना (Capital Structure): NABARD की अधिकृत पूंजी में भारत सरकार और RBI दोनों की हिस्सेदारी है, हालांकि समय के साथ RBI की हिस्सेदारी घटाकर सरकार को हस्तांतरित की गई है ताकि NABARD पूरी तरह सरकार के स्वामित्व में आ सके
NABARD के मुख्य कार्य (Functions)
NABARD के कार्यों को मोटे तौर पर चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है — वित्तीय कार्य, विकासात्मक कार्य, पर्यवेक्षी कार्य, और सलाहकार कार्य।
1. वित्तीय कार्य (Financial Functions)
● रीफाइनेंस सुविधा: NABARD सीधे किसानों या ग्रामीण उद्यमियों को ऋण नहीं देता। यह वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs), राज्य सहकारी बैंकों, और अन्य पात्र संस्थाओं को पुनर्वित्त (refinance) प्रदान करता है, जो आगे किसानों तक पहुंचता है।
● अल्पकालिक ऋण (Short-Term Credit): फसल ऋण (crop loans) और अन्य कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए सहकारी बैंकों और RRBs को अल्पकालिक पुनर्वित्त प्रदान करता है
● मध्यम व दीर्घकालिक ऋण (Medium and Long-Term Credit): सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, बागवानी, पशुपालन जैसी दीर्घकालिक निवेश गतिविधियों के लिए वित्त पोषण करता है
● प्रत्यक्ष ऋण (Direct Lending): कुछ विशेष मामलों में, जैसे राज्य सरकारों की ग्रामीण अवसंरचना परियोजनाओं के लिए, NABARD सीधे भी ऋण देता है
2. विकासात्मक कार्य (Developmental Functions)
● संस्थागत विकास: सहकारी बैंकों, RRBs और अन्य ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं की क्षमता निर्माण (capacity building) में मदद करता है
● वित्तीय समावेशन: बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाता है
● जलवायु और पर्यावरण पहल: वाटरशेड विकास, जलवायु-अनुकूल कृषि, और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को समर्थन देता है
● अनुसंधान और प्रशिक्षण: ग्रामीण विकास और कृषि वित्त से जुड़े अध्ययन, अनुसंधान, और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है
3. पर्यवेक्षी कार्य (Supervisory Functions)
NABARD, RBI की ओर से राज्य सहकारी बैंकों (State Cooperative Banks), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (District Central Cooperative Banks), और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करता है। यह सुनिश्चित करता है कि ये संस्थाएं वित्तीय रूप से मजबूत, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप काम करें।
4. सलाहकार कार्य (Advisory/Policy Functions)
NABARD केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और RBI को कृषि ऋण नीति, ग्रामीण विकास रणनीति और वित्तीय समावेशन से जुड़े मामलों पर तकनीकी सलाह और सिफारिशें देता है। यह हर साल स्टेट फोकस पेपर (State Focus Paper) और पोटेंशियल लिंक्ड क्रेडिट प्लान (Potential Linked Credit Plan) तैयार करता है, जो राज्य स्तर पर ऋण योजना बनाने में मदद करते हैं।
NABARD के प्रमुख फंड्स (Key Funds)
अपने विकासात्मक कार्यों को गति देने के लिए NABARD समय-समय पर विशेष फंड्स बनाता है, जिन्हें केंद्र सरकार के बजट में आवंटन के जरिए पोषित किया जाता है।
● ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF – Rural Infrastructure Development Fund): 1995-96 में स्थापित यह NABARD का सबसे महत्वपूर्ण फंड है। इसके माध्यम से राज्य सरकारों को सड़क, पुल, सिंचाई नहरें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और भंडारण जैसी ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए ऋण दिया जाता है। अब तक RIDF के दर्जनों चरण (tranches) जारी हो चुके हैं और हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को इससे वित्त पोषित किया गया है।
● वेयरहाउस इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (WIF): 2013-14 में ₹5,000 करोड़ के कोष के साथ शुरू किया गया, यह फंड वैज्ञानिक भंडारण अवसंरचना (scientific warehousing) के निर्माण के लिए ऋण देता है, ताकि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके
● दीर्घकालिक सिंचाई कोष (LTIF – Long Term Irrigation Fund): बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए बनाया गया विशेष फंड
● उत्पादक संगठन विकास कोष (Producers Organisation Development Fund): किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organisations – FPOs) को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए
● सूक्ष्म सिंचाई निधि (Micro Irrigation Fund): ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी जल-बचत सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को रियायती दर पर ऋण
NABARD की प्रमुख योजनाएं और पहल (Flagship Schemes)
1. स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज कार्यक्रम (SHG-Bank Linkage Programme)
1992 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस कार्यक्रम माना जाता है। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को सीधे बैंकों से जोड़ा जाता है, जिससे उन्हें बिना भारी-भरकम कागजी कार्रवाई के छोटे ऋण मिल पाते हैं। इस कार्यक्रम ने करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है और महिला सशक्तिकरण में एक बड़ी भूमिका निभाई है।
2. किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC)
KCC योजना किसानों को कम ब्याज दर पर, सरल दस्तावेजीकरण के साथ, कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराती है — बीज, खाद, कीटनाशक जैसी तत्काल जरूरतों के लिए। यह योजना कृषि ऋण को सुव्यवस्थित करने में एक क्रांतिकारी कदम मानी जाती है।
3. वाटरशेड विकास कार्यक्रम (Watershed Development Projects)
मिट्टी और जल संरक्षण, वनरोपण, और जलवायु अनुकूलन पर केंद्रित हजारों वाटरशेड परियोजनाएं NABARD द्वारा शुरू की गई हैं, विशेष रूप से सूखा-प्रवण (drought-prone) क्षेत्रों में।
Umbrella Programme for Natural Resource Management (UPNRM) के तहत व्यक्तियों और संगठनों को सतत विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए सीधा ऋण दिया जाता है।
5. संयुक्त देयता समूह (Joint Liability Groups – JLGs)
भूमिहीन किसानों, बटाईदारों (tenant farmers) और छोटे किसानों को समूह के आधार पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए यह मॉडल अपनाया गया है, जहां समूह के सभी सदस्य संयुक्त रूप से ऋण चुकाने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
NABARD छोटे और सीमांत किसानों को संगठित करके किसान उत्पादक संगठन बनाने में मदद करता है, ताकि वे सामूहिक रूप से खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री कर सकें और बेहतर मोल-भाव की स्थिति में आ सकें।
NABARD की सहायक कंपनियां (Subsidiaries)
अपने विकासात्मक दायरे को और व्यापक बनाने के लिए NABARD ने कई विशेषीकृत सहायक कंपनियां (subsidiaries) बनाई हैं:
● NABKISAN Finance Limited: कृषि और ग्रामीण उद्यमों को वित्त पोषण प्रदान करती है
● NABFINS (NABARD Financial Services): माइक्रोफाइनेंस सेवाएं प्रदान करने वाली एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC)
● NABSAMRUDDHI Finance Limited: सतत विकास से जुड़ी सलाहकार सेवाएं प्रदान करती है
● NABARD Consultancy Services (NABCONS): कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में परामर्श सेवाएं (consultancy services) देती है, देश-विदेश दोनों जगह
● NABVENTURES: कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स में निवेश (venture capital) करती है
● NABSanrakshan Trustee Company: ऋण गारंटी (credit guarantee) से जुड़ी सेवाएं देती है, ताकि छोटे उधारकर्ताओं को ऋण मिलना आसान हो
● NABARD Foundation: कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और सामाजिक विकास से जुड़ी गतिविधियां संचालित करती है
NABARD और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)
भारत में वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल करने में NABARD की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। बैंकिंग सुविधाओं से वंचित सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार, Business Correspondent मॉडल को बढ़ावा, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन, और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम — इन सभी में NABARD की सक्रिय भागीदारी रही है। SHG-Bank Linkage Programme के जरिए एक करोड़ से अधिक महिला समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच मिली है, जो अपने आप में वित्तीय समावेशन की एक बड़ी उपलब्धि है।
NABARD के भागीदार संस्थान (Partner Institutions)
NABARD अकेले काम नहीं करता, बल्कि एक विस्तृत नेटवर्क के जरिए अपने लक्ष्यों को हासिल करता है:
● वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks)
● क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks)
● राज्य व जिला सहकारी बैंक (State and District Cooperative Banks)
● माइक्रोफाइनेंस संस्थान (Microfinance Institutions)
● स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन (SHGs and FPOs)
● राज्य सरकारें और गैर-सरकारी संगठन (State Governments and NGOs)
NABARD की उपलब्धियां (Achievements and Impact)
पिछले चार दशकों में NABARD ने भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से बदला है:
● करोड़ों किसानों तक संस्थागत ऋण की पहुंच सुनिश्चित की
● RIDF के माध्यम से हजारों ग्रामीण सड़क, पुल और सिंचाई परियोजनाएं पूरी करवाईं
● SHG-Bank Linkage के जरिए ग्रामीण महिलाओं का बड़े पैमाने पर आर्थिक सशक्तिकरण किया
● Kisan Credit Card के जरिए कृषि ऋण प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाया
● जलवायु-अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया
● सहकारी बैंकिंग ढांचे को मजबूत और अधिक जवाबदेह बनाया
NABARD के सामने चुनौतियां (Challenges)
● सहकारी बैंकों की कमजोर वित्तीय स्थिति: कई राज्य सहकारी बैंक और जिला सहकारी बैंक अभी भी उच्च NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) और कमजोर पूंजी आधार से जूझ रहे हैं
● क्षेत्रीय असमानता: कुछ राज्यों और क्षेत्रों में ऋण वितरण और बुनियादी ढांचा विकास की गति अन्य की तुलना में धीमी रही है
● जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: बदलते मौसम पैटर्न और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने कृषि ऋण की जोखिम प्रोफाइल को जटिल बना दिया है
● डिजिटल विभाजन: ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक समाधानों को पूरी तरह अपनाने में अभी भी बाधाएं हैं
● छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंच: भूमिहीन किसानों और अत्यंत छोटे जोत वाले किसानों तक औपचारिक ऋण की पहुंच अभी भी एक चुनौती बनी हुई है
भविष्य की दिशा (Way Forward)
आने वाले वर्षों में NABARD की भूमिका और भी व्यापक होने की उम्मीद है। डिजिटल कृषि (Digital Agriculture), जलवायु-वित्त (Climate Finance), फिनटेक साझेदारी, और किसान उत्पादक संगठनों के तेज़ विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। "किसानों की आय दोगुनी करने" (Doubling Farmers' Income) और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप, NABARD नई तकनीकों और नवाचार-आधारित वित्तीय मॉडलों को अपनाकर ग्रामीण भारत के परिवर्तन में अपनी भूमिका और मजबूत कर रहा है।
निष्कर्ष
NABARD केवल एक बैंक नहीं, बल्कि भारत के ग्रामीण और कृषि विकास की रीढ़ है। स्थापना के समय से ही इसने कृषि ऋण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, वित्तीय समावेशन और सतत विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। SHG-Bank Linkage जैसे कार्यक्रमों से लेकर RIDF जैसे बड़े बुनियादी ढांचा कोषों तक, NABARD ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। आने वाले समय में, जैसे-जैसे भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक आधुनिक व तकनीक-संचालित होती जाएगी, NABARD की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।
NABARD की अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं और फंड
ऑफ-फार्म सेक्टर विकास (Off-Farm Sector Development)
खेती के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तशिल्प, हथकरघा, कुटीर उद्योग, और छोटे विनिर्माण जैसी गैर-कृषि गतिविधियां भी बड़ी संख्या में रोजगार देती हैं। NABARD इन ऑफ-फार्म गतिविधियों के लिए भी विशेष वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवल खेती पर निर्भर न रहकर विविधीकृत (diversified) हो सके। इसके अंतर्गत कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों को प्रशिक्षण, बाजार संपर्क (market linkage), और वित्त पोषण की सुविधा दी जाती है।
सहकारिता विकास कोष (Cooperative Development Fund)
सहकारी बैंकिंग ढांचे को आधुनिक बनाने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए NABARD ने सहकारिता विकास कोष की स्थापना की है। इसके तहत सहकारी बैंकों के कर्मचारियों के प्रशिक्षण, कंप्यूटरीकरण, और प्रबंधन सुधार जैसी गतिविधियों को वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि ये संस्थाएं बदलते बैंकिंग परिदृश्य में प्रतिस्पर्धी बनी रह सकें।
जनजातीय विकास कोष (Tribal Development Fund)
आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों के समावेशी विकास के लिए NABARD ने एक विशेष कोष बनाया है, जिसके माध्यम से इन क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन (livelihood promotion), वन-उत्पाद आधारित आय के साधन, और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर काम किया जाता है।
NABARD के डिजिटल और तकनीकी नवाचार
बदलते समय के साथ NABARD ने डिजिटल तकनीक को भी अपने कार्यों में शामिल किया है, ताकि ग्रामीण वित्तीय सेवाएं अधिक तेज़, पारदर्शी और सुलभ बन सकें।
● e-Shakti Programme: स्वयं सहायता समूहों के खातों का डिजिटलीकरण करने की पहल, जिससे बैंकों को इन समूहों की वित्तीय स्थिति का सटीक और तेज़ आकलन करने में मदद मिलती है और ऋण स्वीकृति प्रक्रिया तेज़ होती है
● डिजिटल भुगतान को बढ़ावा: ग्रामीण क्षेत्रों में UPI, मोबाइल बैंकिंग और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों के प्रसार में सहयोग
● डेटा एनालिटिक्स और सैटेलाइट तकनीक: फसल आकलन, जोखिम प्रबंधन (risk management), और परियोजना निगरानी में सैटेलाइट इमेजरी और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ाया जा रहा है
● फिनटेक के साथ साझेदारी: ग्रामीण वित्तीय समावेशन को गति देने के लिए NABARD विभिन्न फिनटेक स्टार्टअप्स के साथ भी सहयोग कर रहा है, खासकर NABVENTURES के माध्यम से निवेश करके
NABARD बनाम अन्य विकास वित्तीय संस्थाएं
भारत में NABARD के अलावा भी कई अन्य विकास वित्तीय संस्थाएं (Development Financial Institutions) काम करती हैं, लेकिन हर एक का फोकस क्षेत्र अलग है। इस अंतर को समझना जरूरी है, खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए।
● SIDBI (Small Industries Development Bank of India): यह लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के वित्त पोषण पर केंद्रित है, जबकि NABARD का फोकस कृषि और ग्रामीण विकास पर है
● EXIM Bank (Export-Import Bank of India): यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात-आयात से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों को समर्थन देता है
● NHB (National Housing Bank): आवास वित्त (housing finance) क्षेत्र के नियमन और विकास के लिए जिम्मेदार है
इन सभी संस्थाओं की तरह NABARD भी RBI और भारत सरकार द्वारा स्थापित एक विशेषीकृत विकास बैंक है, लेकिन इसका दायरा विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण अवसंरचना और ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं तक सीमित और केंद्रित है।
NABARD में करियर के अवसर
NABARD हर साल NABARD Grade A (सहायक प्रबंधक) और Grade B (प्रबंधक) पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित करता है, जो बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। इन परीक्षाओं में सामान्य जागरूकता, अंग्रेजी भाषा, मात्रात्मक योग्यता (quantitative aptitude), तर्कशक्ति (reasoning), और कृषि व ग्रामीण विकास से जुड़े विशेष विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। NABARD में काम करने का अवसर न केवल अच्छा वेतन और सुविधाएं देता है, बल्कि सीधे तौर पर देश के ग्रामीण विकास में योगदान देने का मौका भी देता है।
NABARD का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव — एक विस्तृत नज़र
पिछले चार दशकों में NABARD के हस्तक्षेप से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जो बदलाव आया है, उसे कई स्तरों पर देखा जा सकता है।
● कृषि उत्पादकता में सुधार: सिंचाई और कृषि अवसंरचना में निवेश से फसल उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार हुआ है
● ग्रामीण रोजगार सृजन: RIDF के तहत बनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसर पैदा किए हैं
● महिला सशक्तिकरण: SHG-Bank Linkage Programme ने करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाया है, उनकी निर्णय लेने की क्षमता और घरेलू आय में योगदान बढ़ाया है
● वित्तीय साक्षरता: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और वित्तीय उत्पादों की समझ बढ़ाने में NABARD के कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है
● सतत विकास: जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देकर NABARD ने पर्यावरणीय स्थिरता को भी अपने कार्यों का केंद्र बनाया है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
NABARD की स्थापना कब हुई थी? NABARD की स्थापना 12 जुलाई 1982 को National Bank for Agriculture and Rural Development Act, 1981 के तहत हुई थी।
NABARD का मुख्यालय कहां है? NABARD का मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।
क्या NABARD सीधे किसानों को ऋण देता है? आमतौर पर नहीं। NABARD बैंकों और सहकारी संस्थाओं को पुनर्वित्त (refinance) देता है, जो आगे किसानों तक ऋण पहुंचाते हैं। कुछ विशेष मामलों में ही NABARD सीधे राज्य सरकारों या संस्थाओं को ऋण देता है।
RIDF क्या है? Rural Infrastructure Development Fund (RIDF) NABARD का एक प्रमुख कोष है, जो 1995-96 में स्थापित हुआ था और राज्य सरकारों को ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता देता है।
NABARD किसकी निगरानी करता है? NABARD, RBI की ओर से राज्य सहकारी बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों, और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करता है।
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